Friday, November 14, 2025

मैं हूं ।

 

मैं हूं ।

यह एक आत्मा, जो “मै” है। वह शरीर जो कि “तुम” हो, का होना दिखलाता है।

मैं हूं ।

।। मैं सदा से ही हूं । मैं सदा ही रहूंगा।।

न मै किताबो मैं, ना मंदिर में,
तुम क्यों खोजते हो बाहर।
मै तुम्हारे ही अंदर हु।
मेरे तो केवल शरीर बदले है।
मै अविनाशी हु।

।।मै सदासे था। सदा ही रहूंगा।।

तुम मस्तिष्क से मुझे ना खोजो।
तुम्हारा अहंकार मुझे ढक देता है।
तुम्हारा गर्व मुझे कलुषित कर देता है।
तुम्हारा क्रोध मुझे नष्ट करता है।

तुम क्रोध से विचलित होते हो।
तुम वासना और इर्ष्या से भ्रमित होते हो।

तुम प्रेम को नकार अधिकार को जताते हो।
तुम भूखंको वासना बनाते हो।

मैं ना बना हूं ।
ना मिटता हूं ।

मुझे कोई जन्म नहीं है ।
ना मुझे कोई मृत्यु है ।

मै हर सजीव में हु।
निर्जीव तुम्हे बनाते है।
मै तुम्हारे होने का कारण हु।
मुझ से तुम हो। तुम सब में मैं हु।

मै सृष्टि में हूं ।
आकाश में हूं ।
पानी में हूं ।
पशु में हूं ।
पक्षी में हूं ।

मेरा ना कोई आकर है।
मुझे ना कोई देख सकता है।
मुझे ना कोई निर्मित कर सकता है ।
ना नष्ट कर सकता है।

प्रेम ही मेरा अस्तित्व है ।
प्रेमस्वरूप ही केवल तुम मुझे महसूस कर सकते हो ।
मैं हूं तुम्हारे धड़कन में ।
मै हु तुम्हारे सासों में।
मैं हूं तुम्हारे सीने में ।

ना मैं कभी तुम्हारा था ।
ना मैं कभी तुम्हारा रहूंगा ।
मुझे अपना ना समझो मैं सबका हूं।

मैं अनंत हूं ।
मैं अनादी हूं।
मैं सर्व हु ।
मैं ही स्वर्ग हूं।

मुझे तुम में पाकर आनंदित हो गर्वित हो।
मुझे जानने के लिए ही तुम जन्मे हो।
मुझे जानने मैं ही तो तुम्हारा अस्तित्व है।

मुझे जानते रहो जब तक कि तुम मैं ना हो जाऊं।
यही आत्मा है। यही परमात्मा है।

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